क्यों माथे पर तिलक लगाते है ? क्या है इसका वैज्ञानिक आधार ?

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क्यों माथे पर तिलक लगाते है ? क्या है इसका वैज्ञानिक आधार ?

हिन्दू धार्मिक संस्कारों में माथे पर तिलक लगाया जाता है क्योंकि बिना तिलक लगाए कोई कार्य पूर्ण नहीं माना जाता है। तिलक मुख्य रूप से मस्तक पर, गले पर एवं नाभि पर लगाने का विधान है। अध्यात्म मार्ग में तिलक शरीर के अन्य अंगों में भी लगाया जाता है जैसे दोनों भुजाओं पर आदि। पूजा-पाठ हो, विवाह आदि कोई भी कार्य हो तिलक लगाना अनिवार्य होता ही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक कारण क्या है।

क्यों माथे पर तिलक लगाते है ? क्या है इसका वैज्ञानिक आधार ?

आईये जानते है वो कौनसी वजह है जिसके चलते तिलक लगाना जरूरी होता है। तिलक माथे पर हमेशा मस्तिष्क के केंद्र पर लगाया जाता है। तिलक को मस्तिष्क के केंद्र पर लगाने के पीछे कारण ये है कि हमारे शरीर में सात मुख्य ऊर्जा केंद्र होते हैं। उन्ही ऊर्जा केंद्रों में से एक केंद्र आज्ञाचक्र होता है जो दोनों आँखों के बीच में ऊपर की तरफ़ होता है। इसीलिए तिलक को मस्तिष्क के बीच में लगाया जाता है। ये स्थान इतना महत्वपूर्ण है कि इसी स्थान से मानव अपने को नियंत्रित कर सकता है। आज्ञाचक्र ही एकाग्रता और ज्ञान से परिपूर्ण हैं।

वैसे तो तिलक किसी भी रंग का हो, सभी मे ऊर्जा होती है और सबका अपना महत्व है लेकिन चंदन के तिलक को शीतलदायी माना जाता है, लाल रंग के तिलक को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और पीले रंग के तिलक को प्रसन्नचित रहने के लिए भी लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त शिव उपासक भस्म का तिलक लगाते है, भगवान विष्णु के पूजा में चंदन रोली का तिलक प्रयोग होता है एवं शक्ति पूजा मे सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।