कब से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि ? जानें इसका महत्व

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कब से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि ? जानें इसका महत्व

हिन्दू धर्म में नवरात्रि के पर्व का बहुत ही विशेष महत्व होता है। बहुत ही कम लोगों को ये पता होता है कि वर्ष में दो नहीं बल्कि चार नवरात्रि आती हैं। अधिकांश लोग साल के दो नवरात्रियों के बारे में ही जानते हैं। एक चैत्र मास की और दूसरी अश्विन मास की शारदीय नवरात्र कहलाते हैं। लेकिन इन दो नवरात्रों के अलावा भी दो नवरात्र और होते हैं। जिन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। यह गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं। जो वर्ष में क्रमश: माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन माह में नवरात्रि पड़ती हैं। इस बार माघ मास की गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी 2021 से 21 फरवरी 2021 तक मनाई जाएगी l

कबसे शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि ? जानें इसका महत्व

माघ मास की गुप्त नवरात्रि की साधना का पर्व माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से माघ मास की नवमी तिथि तक चलता है। गुप्त नवरात्रि भी सामान्य नवरात्रियों की तरह नौ दिन ही मनाई जाती हैं। इस दौरान मां की आराधना गुप्त रुप से की जाती है, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त नवरात्रियों में मां भगवती की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रियों का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रियों से भी ज्यादा होता है। गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति कर सकता है। इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है एवं कार्य सिद्धि हेतु भी महत्वपूर्ण होती है।

गुप्त नवरात्रि के अवसर पर माँ भगवती दुर्गा को प्रसन्न करके अपनी मनोकामना पूर्ण की जा सकती है। एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए जो साधक उपासना मार्ग में है उन्हें नवरात्र साधना करने में पूर्ण संयम और शुद्धता के साथ मां भगवती की आराधना करनी चाहिए। गुप्त नवरात्रि की पूजा के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों के साथ-साथ दस महाविद्यियाओं की भी पूजा का विशेष महत्व है। ये दस महाविद्याएं इस प्रकार से है – माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ धूमावती, माँ बगुलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं।
सांसारिक लोग इस नवरात्रि को भी ठीक उसी तरह मनाएं जिस तरह आप लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रियों को मनाते हैं। गुप्त नवरात्रों के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरुपों की पूजा करें।