कब है मौनी अमावस्या, मौनी अमावस्या का क्या महत्व है, जानिए शुभ मुहूर्त

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कब है मौनी अमावस्या, मौनी अमावस्या का क्या महत्व है, जानिए शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। माघ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मौनी अमावस्या के दिन लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इस दिन लोग पीपल के वृक्ष तथा भगवान विष्णु की भी विधिपूर्वक पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखना चाहिए। मौन व्रत रखें से शक्ति का संचय होता है साथ ही विशेष रूप से मानसिक शांति प्राप्त होती है।

मौनी अमावस्या के दिन पितृों का तर्पण करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मुनि शब्द से मौनी शब्द की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इस दिन मौन रहने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति भी होती है।

कब है मौनी अमावस्या, मौनी अमावस्या का क्या महत्व है, जानिए शुभ मुहूर्त

पौराणिक कथाओं के अनुसार माघ मास की अमावस्या के दिन मौन रहने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि यदि इस दिन मौन रहना संभव ना हो तो माघ मास की अमावस्या के दिन असत्य और कड़वा नहीं बोलना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। अमावस्या के दिन चंद्र देव के दर्शन नहीं होते। इसलिए इस दिन मन की स्थिति कमजोर रहती है। अमावस्या के दिन मौन रहकर मन को संयम में रखने का विधान बताया गया है। मौनी अमावस्या के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है।

मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त

माघ मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 10 फरवरी 2021 की रात्रि 01 बजकर 10 मिनट से होगा और अमावस्या तिथि समाप्त 11 फरवरी 2021 की रात्रि 12 बजकर 27 मिनट पर होगी। अतः मौनी अमावस्या 11 फरवरी 2021 को मनाया जाना उचित है l

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मौनी अमावस्या को गंगा स्नान एवं दान

मौनी अमावस्या का अपना ​एक विशेष महत्व है। इस दिन संभव हो सके तो गंगा नदी में स्नान करना चाहिए। साथ ही पूरे दिन मौन भी रहना चाहिए। मौन व्रत रखने से व्यक्ति के अंदर आत्मबल मजबूत होता है। गंगा स्नान के बाद सुपात्रों को दान अवश्य करना चाहिए जिसमें तिल के दान का विशेष महत्व है l धार्मि​क मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव तीनों की ही कृपा प्राप्त होती है l