कब है सकट चौथ, क्या है शुभ मुहूर्त और इसका महत्त्व

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जानें सकट चौथ का शुभ मुहूर्त और इसका महत्त्व

हिन्दू धर्म मे सकट चौथ का विशेष महत्व है। प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथि आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में जिसे विनायकी चतुर्थी कहते हैं और दूसरी कृष्ण पक्ष में जिसे संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। लेकिन सभी माह में माघ मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। जिसे तिलकुटा चौथ, सकट चौथ, माघी चतुर्थी आदि नामों से भी जाना जाता है। संकष्टी का अर्थ होता है संकटों का हरण करने वाली चतुर्थी। इस दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की सलामती और लंबी उम्र के लिए गणेश भगवान की पूजा अर्चना करती हैं और पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए निर्जला व्रत करती हैं।

इस दिन व्रत रखकर भगवान गणपति की विधि पूर्वक आराधना की जाती है तथा उन्हें तिल के लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। रात में चंद्र दर्शन के बाद इस व्रत को खोला जाता है। रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। किन्तु कुछ स्थानों पर महिलाएं व्रत के बाद सबसे पहले शकरकंद का प्रयोग करती हैं। ऐसी मान्यता है कि सकट चौथ पर गणपति की पूजा से सारे संकट दूर हो जाते हैं और संतान की रक्षा होती है। सकट चौथ का व्रत विशेष रुप से संतान की दीर्घायु और उनके सुखद भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस बार सकट का व्रत 31 जनवरी 2021 रविवार के दिन मनाया जाएगा।

जानें सकट चौथ का शुभ मुहूर्त और इसका महत्त्व

सकट चौथ का शुभ मुहूर्त:

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 31 जनवरी 2021 को रात्रि 08 बजकर 24 मिनट से होगा और चतुर्थी तिथि का समापन 01 फरवरी 2021 सायं 06 बजकर 24 मिनट पर होगा।

सकट चौथ चंद्रोदय का समय- रात्रि 08 बजकर 41 मिनट पर 31 जनवरी 2021।

सकट चौथ का महत्व

ऐसी मान्यता है कि जो माताएं सकट चौथ के दिन निर्जला व्रत रखती हैं और पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ गणेश भगवान की पूजा करती हैं, उनकी संतान हमेशा निरोग रहती है। ये व्रत करने वालों पर गणपति भगवान की विशेष कृपा होती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।