कब से प्रारंभ होंगे शारदीय नवरात्रि, क्या है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

September 30, 2021by Astro Sumit0

हिन्दू व्रत एवं त्योहारों में एक प्रमुख स्थान नवरात्रि का है। नवरात्रि का पर्व प्रत्येक वर्ष में चार बार पड़ता है। दो गुप्त नवरात्रि होती है और दो नवरात्रि हम सब बड़े ही धूमधाम से मनाते है – एक तो वासंतिक नवरात्रि जो चैत्र माह में मनाई जाती है और दूसरी शारदीय नवरात्रि जो आश्विन माह में मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि का अपना महत्व है। देश के कई भागों में शारदीय नवरात्रि को दुर्गा पूजा भी कहते है। कई राज्यों में नवरात्रि के नौ दिनों में रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। इसके बाद दशहरे के दिन रावण का दहन किया जाता है।

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नवरात्रि में माता के नौ रूपो की पूजा अर्चना की जाती है। माता के नौ रूप इस प्रकार से है।

जानें देवी के नौ रूप –

  1. मां शैलपुत्री पूजा
  2. मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  3. मां चंद्रघंटा पूजा
  4. मां कुष्मांडा पूजा
  5. मां स्कंदमाता पूजा
  6. मां कात्यायनी पूजा
  7. मां कालरात्रि पूजा
  8. मां महागौरी दुर्गा पूजा
  9. मां सिद्धिदात्री पूजा

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश की स्थापना अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ 06 अक्टूबर 2021 को सायं 04 बजकर 34 मिनट पर होगा और प्रतिपदा तिथि का समापन 07 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट पर होगा। अतः 07 अक्टूबर 2021 से नवरात्रि मनाई जाएगी।
कलश स्थापना शुभ मुहूर्त – कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 07 अक्टूबर को प्रातः 06:02 बजे से सुबह 06:50 बजे तक रहेगा।

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कलश स्थापना कैसे करें

हिन्दू धर्म में कलश पूजन और कलश स्थापना का अपना एक अलग ही महत्व होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश की स्थापना हमें प्रत्येक पूजन के दौरान करनी होती है और उसके लिए हम सोने, चांदी, पीतल, तांबा और मिट्टी का कलश ले सकते हैं। पूजन में कलश स्थापना के लिए प्लास्टिक और स्टील का कलश नही लेना चाहिए।

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आईये जानते है सरल तरीके से कैसे कलश स्थापना की जा सकती है वैसे तो उत्तम रहेगा किसी योग्य आचार्य के द्वारा स्थापना कराई जाए क्योंकि कलश स्थापना मन्त्रो के द्वारा ही करनी चाहिए। किन्तु यदि आप स्वयं कलश स्थापना करना चाहते है तो आइए आपको बताते है एक सरल तरीका स्थापना का।

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े पहने। इसके बाद लाल कपड़ा एक चौकी पर बिछाएं। इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें। सबसे पहले कलश के कंठ में आपको मौली बांधनी चाहिए। एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। एक बात का ध्यान अवश्य रखे कलश के जल मे गंगाजल अवश्य मिला दें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर कलावा बांधें। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर आम के पत्ते रखदे। एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें। इस नारियल को कलश के ऊपर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें और दीप प्रज्वलित करके देवी का पूजन करें।

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