चैत्र नवरात्रि में पाएं माँ दुर्गा की विशेष कृपा l जानिए घट स्थापना का मुहूर्त l कैसे करें कलश स्थापना

April 5, 2021by Astro Sumit0

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में 4 बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि मुख्य रूप से प्रचिलित है। खास बात यह है कि नवरात्रि इस बार पूरे नौ दिन रहेगी। इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से आरम्भ हो रही है और 21 अप्रैल को समाप्त होगी।

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नौ दिन तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को अलग-अलग प्रकार से पूजते है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन बहुत महत्व रखता है। इस दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना करने का विशेष महत्व है। इसलिए नवरात्रि के दिन देवी दुर्गा की पूजा से पहले कलश की स्थापना की जाती है।

नवरात्रि में माता के नौ रूपो की पूजा अर्चना की जाती है। माता के नौ रूप इस प्रकार से है। जानें देवी के नौ रूप –

मां शैलपुत्री पूजा
मां ब्रह्मचारिणी पूजा
मां चंद्रघंटा पूजा
मां कुष्मांडा पूजा
मां स्कंदमाता पूजा
मां कात्यायनी पूजा
मां कालरात्रि पूजा
मां महागौरी दुर्गा पूजा
मां सिद्धिदात्री पूजा

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि में पाएं माँ दुर्गा की विशेष कृपा l जानिए घट स्थापना का मुहूर्त l कैसे करें कलश स्थापना

कलश की स्थापना चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ 12 अप्रैल सुबह 08:00 से होगा और प्रतिपदा तिथि समाप्त का समापन 13 अप्रैल को सुबह 10:16 बजे तक होगा। अतः 13 अप्रैल 2021 को नवरात्रि मनाई जाएगी।

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त – कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल की सुबह 05:58 बजे से सुबह 10:00 बजे तक रहेगा।

कलश स्थापना कैसे करें

हिन्दू धर्म में कलश पूजन और कलश स्थापना का अपना एक अलग ही महत्व होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश की स्थापना हमें प्रत्येक पूजन के दौरान करनी होती है और उसके लिए हम सोने, चांदी, पीतल, तांबा और मिट्टी का कलश ले सकते हैं। पूजन में कलश स्थापना के लिए प्लास्टिक और स्टील का कलश नही लेना चाहिए।

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े पहने। इसके बाद लाल कपड़ा एक चौकी पर बिछाएं। इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें। सबसे पहले कलश के कंठ में आपको मौली बांधनी चाहिए। एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। इस जल में गंगाजल अवश्य मिला दें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर कलावा बांधें। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर आम के पत्ते रखदे। एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें। इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन क करें और दीप प्रज्वलित करके देवी का पूजन करें।

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