कब मनाएं गीता जयंती , क्या है भगवद गीता का मानव जीवन पर प्रभाव

December 19, 2020by Astro Sumit3

भारतीय ग्रथों में गीता का स्थान सर्वोपरि रहा है। गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को कुरुक्षेत्र में हुआ। “इस वर्ष गीता जयंती का उत्सव 25 दिसंबर 2020 को मनाया जायेगा।” महाभारत के समय अर्जुन को ज्ञान का मार्ग दिखाते हुए श्री कृष्ण के मुख से श्रीमद्भागवत गीता प्रकट हुई। मनुष्य के हाथ में केवल कर्म करने का अधिकार है फल की चिंता करना व्यर्थ है अर्थात निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिये यह वाक्य गीता जी का सुप्रसिद्ध वाक्य है।

श्रीमद्भागवत गीता जितना सरल लगती है उतना है नही क्योंकि गीता जी का वक्ता स्वयं भगवान कृष्ण है और श्रोता स्वयं अर्जुन के स्तर का ज्ञानी। गीता का ज्ञान गीता पढ़ने वाले को हर बार एक नये रूप में हासिल होता है। मानव जीवन का कोई भी ऐसा पहलू नहीं है जिसकी व्याख्या गीता में न मिले।

गीता जयंती की कथा

गीता के आविर्भाव की कहानी महाभारत में मिलती है। दरअसल गीता महाभारत का ही अंग है। जब यह निश्चित हो गया कि अब कौरव और पांडव का युद्ध होगा तब कुरुक्षेत्र मे कौरव और पांडव एक दूसरे के आमने सामने हो गये और युद्ध के पूर्व अर्जुन ने अपने सामने गुरु द्रोण, भीष्म पितामह आदि को सामने पाया। उस समय उसे आभास हुआ कि वह किसके लिये युद्ध कर रहा है, ये सब तो मेरे अपने हैं। अर्जुन के मन में कुरुक्षेत्र की भूमि में संशय उत्पन्न होने लगा कि मैं युद्ध करू या नही और अपने हथियारों को त्याग दिया। अवसादग्रस्त अर्जुन को देखकर सारथी बने भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य विमुख होने से बचाने के लिये गीता का उपदेश दिया।

श्रीमद्भागवत गीताइसमें उन्हें आत्मा-परमात्मा से लेकर धर्म-अधर्म से जुड़ी अर्जुन की हर शंका का समाधान किया। भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुये ये संवाद ही श्रीमद्भगवद गीता का उपदेश हैं। जीवन की ऐसी कोई समस्या नही है जिसका समाधान गीता जी मे न हो। गीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को व्यक्त करती है। कृष्ण के उपदेशों को प्राप्त कर अर्जुन उस परम ज्ञान की प्राप्ति करते हैं जो उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर उन्हें कर्म की ओर प्रवृत करने में सहायक सिद्ध होती है।

भगवद् गीता का महत्व

श्रीमद् भगवद् गीता का मानव जीवन के लिये बहुत अधिक महत्व है। इसका उपदेश मनुष्य को जीवन की वास्तविकताओं से परिचित करवाता है। क्या करे कैसे करे कर्म, धर्म, अधर्म, ज्ञान, भक्ति सभी विषयों पर गीता जी मे पाएं जाते है। वास्तव मे गीता जी मानव को कर्तव्यपरायण बनाती है। इसके अध्ययन, श्रवण, मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता का भाव आता है। गीता जी के श्लोक में मात्र संदेश नहीं हैं बल्कि ये वो मूल मंत्र हैं जिन्हें हर कोई अपने जीवन में उतारकर पूरी मानवता का कल्याण कर सकता है।

गीता अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आत्मज्ञान से व्यक्ति के जीवन को प्रकाशित करती है। विधिपूर्वक गीता व भगवान विष्णु की पूजा करने पर यथा शक्ति दानादि करने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है। गीता जयंती के दिन श्री कृष्ण जी का पूजन करने से आत्मिक शांति व ज्ञान की प्राप्ति होती है व मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।

आज के युग मे जब मनुष्य भोग विलास, भौतिक सुखों में जकडा़ हुआ है तब इस ज्ञान का प्रादुर्भाव उसे समस्त अंधकारों से मुक्त कर सकता है क्योंकी जब तक मनुष्य अपनी इंद्रियों के आधीन है, भौतिक आकर्षणों से घिरा हुआ है तब तक उसे शांति एवं मुक्ति का मार्ग प्राप्त नहीं हो सकता।

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